परिचय

इस स्थल के पीछे की युवा विद्यार्थिनी

रस भारत एक विद्यार्थी-प्रणीत डिजिटल सांस्कृतिक ज्ञान-मंच है — एक ऐसी युवा कलाकार द्वारा परिकल्पित और संकलित, जिसके लिए भारत की संस्कृति पाठ्यक्रम का विषय नहीं, प्रतिदिन की साधना है।

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घुँघरुओं की माला

देवांगी जन्मोह

रस भारत की परिकल्पक एवं संकलक

हर अर्थ में कला की विद्यार्थिनी बेंगलूरु की एक स्कूली छात्रा — कलाओं की राह पर एक विद्यार्थिनी

बेंगलूरु, कर्नाटक कथक, सितार व गायन की विद्यार्थिनी गुरु-शिष्य परम्परा की साधिका
मंच पर कथक प्रस्तुति में देवांगी जन्मोह, भुजाएँ फैलाए एक सुंदर मुद्रा में
मंच पर कथक प्रस्तुति में देवांगी।

केंद्र में कथक

देवांगी बेंगलूरु में कक्षा 8 की छात्रा हैं, और कथक उनकी सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है। वे कथक में डॉ. रूमा शील की, हिन्दुस्तानी गायन में श्री सौरव डे की, और सितार में श्रीमती गीता श्रीधर की शिष्या हैं — और यह स्थल गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता के साथ समर्पित है। वे सबसे पहले एक विद्यार्थिनी हैं — गुरु-शिष्य परम्परा की राह पर एक-एक क़दम चलती हुईं: श्रेणीबद्ध परीक्षाएँ, सीसीआरटी छात्रवृत्ति का प्रोत्साहन, और मंच के पहले अनुभव — जहाँ तत्कार की लय और चक्करों की गति धीरे-धीरे पाठ से भाषा बनने लगती है। उनके आगे का रास्ता पीछे से कहीं लम्बा है — और यही भावना इस स्थल की भी है।

घुँघरुओं से आगे

उनकी जिज्ञासा नृत्य पर नहीं रुकती। वे सितार और हिन्दुस्तानी गायन भी सीखती हैं — वह स्वर-संसार जिससे कथक मंच पर संवाद करता है — और उन्होंने कर्नाटक के रात-भर चलने वाले तेजस्वी नृत्य-नाट्य यक्षगान को भी जाना है, जो उनके उत्तर भारतीय शास्त्रीय प्रशिक्षण को उनके अपने राज्य के जीवित लोकनाट्य से जोड़ता है।

हिन्दुस्तानी गायन प्रस्तुति में माइक्रोफ़ोन पर देवांगी जन्मोह
प्रस्तुति में — हिन्दुस्तानी गायन।
मंच पर बैठकर सितार बजाती देवांगी जन्मोह, अग्रभूमि में फूल
सितार पर, संगीत-सभा में।

यह स्थल क्यों है

रस भारत उसी यात्रा से उपजा: एक नृत्यांगना की यह अभिलाषा कि भारत के सारे कला-रूप — सर्वाधिक प्रतिष्ठित शास्त्रीय परम्पराओं से लेकर सुदूरतम लोक और जनजातीय कलाओं तक — एक स्थान पर एकत्र हों, सच्चाई से दर्ज हों, और हर सीखने वाले के लिए सुलभ हों। यह उसी भावना से अर्पित है जिससे कलाएँ स्वयं आगे बढ़ाई जाती हैं: गुरुजनों के प्रति आदर, साधना का आनंद, और यह विश्वास कि संस्कृति उन सबकी है जो उससे प्रेम करते हैं।

इस पहल के विषय में: रस भारत देवांगी जन्मोह द्वारा परिकल्पित एवं संकलित एक विद्यार्थी-प्रणीत सांस्कृतिक पहल है। इसके उद्देश्य, शोध, विषय-संरचना, वर्गीकरण और प्रस्तुति में उनका योगदान है; तकनीकी एवं प्रशासनिक सहयोग जन्मोह टेक्नोलॉजीज़ प्रा. लि. का है, जिसके पास स्थल का सर्वाधिकार है (© 2026)। सामग्री शैक्षिक, अव्यावसायिक उपयोग हेतु संकलित है; साधकों और विद्वानों के सुझाव व संशोधन स्थल के अभिभावक-प्रबंधित माध्यमों — संपर्क पृष्ठ या namaste.rasabharat@gmail.com — से सादर आमंत्रित हैं।
सह-विद्यार्थियों के लिए: यदि देवांगी की राह आपको आकर्षित करती है, तो अनुभव व शिक्षा पृष्ठ देखिए — उसमें उत्सव, प्रशिक्षण-संस्थान, परीक्षा-बोर्ड और युवा कलाकारों की छात्रवृत्तियाँ (सीसीआरटी सहित) सूचीबद्ध हैं — और इस स्थल पर उपलब्ध निःशुल्क हिन्दुस्तानी संगीत एवं सितार अध्ययन-पुस्तिका भी। कोई सुझाव या विचार? देवांगी को लिखिए