साधना — गहन अध्ययन

निरन्तर अभ्यास, निरन्तर अध्ययन

इस स्थल का अधिकांश भाग सौ कलाओं का मानचित्र है। साधना अलग है: देवांगी के अपने प्रशिक्षण के केन्द्र की कलाओं की सम्पूर्ण मार्गदर्शिकाएँ — अभ्यास के भीतर से लिखी हुई, प्रामाणिक संदर्भों से जाँची हुई, और गुरुजनों के संशोधन के लिए खुली। स्थल का शेष भाग परिचय कराता है; ये पृष्ठ साथ चलते हैं।

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ध्यान दें: गहन-अध्ययन पृष्ठ अभी अंग्रेज़ी में हैं; हिन्दी संस्करण क्रमशः आ रहे हैं — यक्षगान अब हिन्दी में उपलब्ध है।

शृंखला

कथक — गहन अध्ययन अब उपलब्ध

उपलब्ध इतिहास · घराने · सम्पूर्ण प्रस्तुति-क्रम · तत्कार और लय · ताल · शिक्षार्थी का मार्ग

कथावाचक की कला, सम्पूर्ण रूप में: कथकारों और लखनऊ दरबार से लेकर टुकड़ा, परन, चक्करदार और तराना तक — हर प्रस्तुति-अंश की व्याख्या, चित्रों के साथ। आरम्भ करें → (अंग्रेज़ी)

हिन्दुस्तानी गायन — गहन अध्ययन अब उपलब्ध

उपलब्ध स्वर और श्रुति · राग की रचना · थाट · ताल · ध्रुपद से ठुमरी तक · ख़याल की यात्रा · घराने · रियाज़

पहला वाद्य — कण्ठ — सम्पूर्ण रूप में: स्वर वास्तव में क्या है (12-स्थान सप्तक चित्र के साथ), राग भीतर से कैसे काम करता है, रूपों की सीढ़ी, ख़याल की पूरी यात्रा, महान घराने — और वह भोर का रियाज़ जो आवाज़ गढ़ता है। आरम्भ करें → (अंग्रेज़ी)

सितार — गहन अध्ययन अब उपलब्ध

उपलब्ध रचना · उद्गम · स्वर-मिलान · दा-रा-दिरि · मींड · आलाप से झाला तक · शैलियाँ · आरम्भिक वर्ष

वाद्य का अंग-अंग परिचय (नामांकित चित्र के साथ), विवादित उद्गम की ईमानदार कथा, आघात-भाषा, बाएँ हाथ की मींड, इटावा और मैहर शैलियाँ, और आरम्भिक विद्यार्थी का मार्ग। आरम्भ करें → (अंग्रेज़ी)

सहयोगी खण्ड

शिक्षार्थी की अपनी तीन कलाओं से आगे: उसके गृह-राज्य का महान रंगमंच, और वह वाद्य जो सबका साथी है।

यक्षगान — गहन अध्ययन अब उपलब्ध

उपलब्ध तेंकु–बडगु तिट्टु · हिम्मेळ और मुम्मेळ · अर्थगारिके · वेष · रात्रि की यात्रा · मेले

तटीय कर्नाटक का सांझ-से-भोर तक चलने वाला सम्पूर्ण रंगमंच — रंगस्थल की रूपरेखा, आशु-संवाद (अर्थगारिके) की परम्परा, और घुमन्तू मेलों का संसार। अब हिन्दी में भी। आरम्भ करें →

तबला — गहन अध्ययन अब उपलब्ध

उपलब्ध जोड़ी की रचना · बोल-भाषा · ठेका और ख़ाली · क़ायदा से चक्रधार तक · छह घराने · रामन का शोध

ख़याल, सितार और कथक — सबका साथी बोलता हुआ वाद्य — रचना-चित्र, एकल वादन की यात्रा, छह घराने, और स्याही का भौतिक विज्ञान। आरम्भ करें → (अंग्रेज़ी)

ये ही कलाएँ क्यों? गहराई के लिए आधार चाहिए। देवांगी प्रतिदिन कथक, हिन्दुस्तानी गायन और सितार का अभ्यास करती है — इसलिए इन्हीं कलाओं को यह स्थल भीतर से प्रलेखित कर सकता है, और संशोधन के लिए गुरुजन भी निकट हैं। भारत की कलाओं का व्यापक मानचित्र स्थल के मुख्य अनुभागों में है; साधना के पृष्ठ अभ्यास की टिप्पणी-पुस्तिकाएँ हैं।